नमस्कार दोस्तों,आप कैसे हैं,? आशा है कि आप अच्छे से होंगे। मैं आपके समक्ष नये-नये विषयों पर और रुचिकर आर्टीकल पेश करते रहता हूँ, जिसको पढ़ने से आपके मन को शाँति मिलती होगी।आज फिर से हम अपने जीवन से जुड़ी कुछ वास्तविक बातों पर चर्चा करने जा रहे हैं,जो कि आपको पसंद आएगी। सीखने का नजरिया मुझे इतना तो अनुभव है कि पाठशाला से मनुष्य वास्तव में अधूरे से भी कम ज्ञान प्राप्त कर पाता है और अपने जीवन में उससे कहीं अधिक बन भी जाता है। वहाँ पर वह केवल किताबी ज्ञान और उपदेशों को सुनकर उन्हें कंठस्थ तो कर सकता है परन्तु उनको क्रियात्मक रुप वह अपने दैनिक जीवन में ही दे सकता है। वास्तव में हम जो कुछ सीखते हैं वह किसी पाठशाला से नहीं वरन अपने जीवन की पाठशाला से ही हम 'सीखने' शब्द का सही अर्थ ले सकते हैं। शिक्षा पाने के लिए जब हम अपने चारों ओर दृष्टि डालते हैं तो हमें मालूम होता है कि हमारा एक - एक दृष्टि हमें सिखाता है, सीखने का अवसर देता है। सूर्य का उदय होना, पक्षियों का कलरव, पृथ्वी का इतने प्राणियों का बोझ उठाना यह सब सीख नहीं है तो और क्या है। दुनिया एक शिक्षक है दोस्तों हम ...
प्रेम मनुष्य के जीवन में सबसे महत्वपूर्ण तत्व प्रेम है। हमारे हृदय में प्रेम रहने के कारण ही हम एक दूसरे के साथ मेल-मिलाप,आदर,और कुशल व्यवहार के साथ रह पातेहैं।अगर हममें एक दूसरे के प्रति प्रेम नहीं रख पाते हैं तो जरुर प्रेम की जगह ईर्ष्या का भाव होगा।क्योंकि प्रेम हमेशा लोगों को एक दूसरे के साथ जुड़कर रहना सीखाता है। प्रेम की परिभाषा वैसे तो प्रेम को शब्दों में परिभाषित नहीं किया जा सकता,तो पर भी प्रेम से संबंधित कुछ बातें जरुर लिखना चाहता हूँ। जिस प्रकार बहती हवा को और फूलों की खुशबू को हम देख नहीं सकते,उसको छू नहीं सकते,बस उन्हें केवल अनुभव किया जा सकता है; ठीक उसी प्रकार प्रेम को भी केवल अनुभव किया जा सकता है।वो भी परिमाण के अनुसार प्रेम का एहसास किसका प्रेम किसके प्रति कितना है,इसका अंदाजा लगा पाना मुश्किल है।आजके युवा पीढ़ी,लड़का-लड़की एक दूसरे से प्यार-मोहब्बत की बातें करते हैं,ईश्क करते हैं,इस प्रेम का मतलब वैसा नहीं है।प्रेम मानव जीवन के उस मधुरतम भावना को प्रकट करता है,जिसमें आदर, आनन्द,सहयोग, मेल,धीरज,नम्रता,दीनता,भलाई सभी सात्विक बातों का समावेश होत...