प्रेम मनुष्य के जीवन में सबसे महत्वपूर्ण तत्व प्रेम है। हमारे हृदय में प्रेम रहने के कारण ही हम एक दूसरे के साथ मेल-मिलाप,आदर,और कुशल व्यवहार के साथ रह पातेहैं।अगर हममें एक दूसरे के प्रति प्रेम नहीं रख पाते हैं तो जरुर प्रेम की जगह ईर्ष्या का भाव होगा।क्योंकि प्रेम हमेशा लोगों को एक दूसरे के साथ जुड़कर रहना सीखाता है। प्रेम की परिभाषा वैसे तो प्रेम को शब्दों में परिभाषित नहीं किया जा सकता,तो पर भी प्रेम से संबंधित कुछ बातें जरुर लिखना चाहता हूँ। जिस प्रकार बहती हवा को और फूलों की खुशबू को हम देख नहीं सकते,उसको छू नहीं सकते,बस उन्हें केवल अनुभव किया जा सकता है; ठीक उसी प्रकार प्रेम को भी केवल अनुभव किया जा सकता है।वो भी परिमाण के अनुसार प्रेम का एहसास किसका प्रेम किसके प्रति कितना है,इसका अंदाजा लगा पाना मुश्किल है।आजके युवा पीढ़ी,लड़का-लड़की एक दूसरे से प्यार-मोहब्बत की बातें करते हैं,ईश्क करते हैं,इस प्रेम का मतलब वैसा नहीं है।प्रेम मानव जीवन के उस मधुरतम भावना को प्रकट करता है,जिसमें आदर, आनन्द,सहयोग, मेल,धीरज,नम्रता,दीनता,भलाई सभी सात्विक बातों का समावेश होत...

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