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परिश्रम ही सफलता की कुंजी है।


नमस्कार दोस्तों, आज मैं परिश्रम और सफलता से संबंधित विषय पर लेख तैयार करना चाहता हूं। कि कैसे हमें परिश्रम करने से सफलता मिलती है,क्योंकि हम सभी जानते हैं, कि बिना परिश्रम किए किसी को कुछ भी उपलब्धि मिल पाना असम्भव होता है।आशा है कि आपको पसंद आएगी।





परिश्रम क्या है ?


 जब व्यक्ति अपने शारीरिक तथा मानसिक रुप से किसी कार्य को करता है,तब वह परिश्रम कहलाता है। कोई व्यक्ति किसी काम को करने के लिए अपनी ईच्छा अनुसार काम का चयन करता है और उसके माध्यम से अपने जीवन में कुछ पाने की ईच्छा रखता है।पहले श्रम का मतलब सिर्फ शारीरिक रुप से किए जाने वाले श्रम को समझा जाता था, जिसे गरीब समुदाय के लोग मजदूर या लेबर के रुप में काम करते थे। लेकिन आधुनिक दूनिया ऐसी नहीं है, वैग्यानिक,डाॅक्टर,इंजिनियर, टीचर, राजनीतिज्ञ ,वकील,सभी सरकारी व प्राइवेट कर्मचारी अपने-अपने जगह पर काम करते हैं।दूनिया का हर इंसान अपने-अपने क्षेत्रों में परिश्रम कर रहे हैं।


परिश्रम की नितान्त आवश्यकता


परिश्रम इस प्रकृति का नियम है,जो हमारे जीवन के हर क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। हम परिश्रम के बिना कुछ भी हासिल नहीं कर सकते और नहीं उसके बिना जीवित रह सकते हैं। आपको भोजन करने के लिए भी उसको प्राप्त करने की आवश्कता है,और यह बिना मेहनत किये कभी हमें प्राप्त नहीं हो सकता। आपको खुश रहने के लिए भी परिश्रम की आवश्यकता पड़ती है। सभी लोग अपने जीवन में परिश्रम के द्वारा ही ज्ञान को प्राप्त करते हैं।

       

 इस संसार में सुन्दर-से-सुन्दर और बहुमूल्य वस्तुओं को भी प्रकृति ने अपने स्वस्थ और परिश्रमी हाथों से बनाया है, और उन्हें बंद दरवाजे में कठोर ताले से बंद करके रखा है, वह मजबूत ताला कठोर परिश्रम से ही खुलता है। श्रम ही सफलता का जनक होता है। परिश्रम करने वाला व्यक्ति इस बात का हिसाब नहीं लगाता कि कितने दिनों बाद उसको उसके परिश्रम का लाभ मिलेगा या सफलता मिलेगी।परिश्रम की गति कम भी हो,लेकिन वह किसी की भलाई के लिए हो,फूल कैसे भी हों, लेकिन फूल के पौधे लगाने की चिंता करनी चाहिए।श्रम कैसा भी हो, वह सदा श्रेष्ठ और पवित्र होता है।


  परिश्रम का महत्व


परिश्रम ही सफलता की पहली कुंजी होती है,इसके बिना सफलता का स्वाद कभी भी नहीं चखा जा सकता। जिन्दगी में आगे बढ़ने के लिए,सुख-सुविधा के साथ रहने के लिए,अपने लक्ष्य को पाने के लिए इन्सान को श्रम करना ही पड़ता है। 



भगवान ने श्रम करने का गुण मनुष्यों के साथ-साथ सभी जीव-जन्तुओं को भी दिया है।पक्षी भी सुबह उठकर अपने खाने-पीने का इंतजाम करते हैं। जब पक्षी छोटे होते हैं, तो सबसे पहले उसको उड़ना सिखाया जाता है, फिर उसको भोजन की व्यवस्था करना सिखाया जाता है, ताकि वह अपना पालन-पोषण खुद कर सके। दुनिया में हर जीव-जन्तु को, अपना पेट भरने के लिए खुद मेहनत करना पड़ता है। इसी तरह मनुष्यों को भी बचपन से ही बड़े होते तक, श्रम करना सिखाया जाता है। चाहे पढ़ाई के लिए हो, चाहे पैसे कमाने के लिए हो या फिर नाम कमाने के लिए हो। मेहनत के बिना कुछ भी हाथ नहीं आता।



परिश्रमी के भेद


 1.मजबूत ईरादा रखना

परिश्रमी व्यक्ति हमेशा अपने ईरादों में पक्का हेता है।वह पीछे हटने वालों  में से नहीं होता है।क्योंकि परिश्रमी व्यक्ति आत्मविश्वासी, ईमानदार और सच्चा होता है।वह हमेशा कठिन मेहनत करके अपने लक्ष्य को पाने का प्रयत्न करते रहता है।छोटी-मोटी कुछ रुकावटों व बाधाओं के आने पर भी वह अपने मार्ग में सफलता की ओर प्रयत्नशील रहता है।


 2. असफलता से हार न मानना

 कई लोगों को कभी-कभी बहुत परिश्रम करने के बावजूद भी सफलता नहीं मिल पाती है,जिसके कारण वे निराश होकर अपने जीवन में कुछ भी करने या बनने की चाह को खो बैठते हैं।इस दूनिया में सफल हुए व्यक्तियों को बार-बार असफलता का सामना करना पड़ा है, तब कहीं जाकर उन्हें सफलता हासिल हुई है। अगर धीरुभाई अम्बानी उस छोटी सी कुटिया में बस बैठे ही रहते,मेहनत न करते तो आज उनका इतना बड़ा कारोबार न होता।अगर अब्राहम लिंकन स्ट्रीट लाईट में बैठकर पढ़ाई न करते तो वे अमेरिका के राष्ट्रपति कभी नहीं बन पाते।नरेन्द्र मोदी मेहनत न करते तो आज चाय के ही दुकान में बैठे होते।


 3.अपनी इच्छानुसार काम करना

परिश्रमी व्यक्ति पूरी दक्षता के साथ किसी कार्य को करने की इच्छा रखता है।कई लोग दूसरों की बातों में आकर किसी काम को पूरे मन से नहीं कर पाते हैं,क्योंकि वह काम उनके इच्छा के अनुकूल नहीं था, और किसी के दबाव में आकर उस कार्य का चयन किए हैं,जिसके वजह से उस कार्य में उनकी आलस्यता है।हमें अपनी इच्छा अनुसार ही काम करना चाहिए,तभी हम उसे पूरे मन और लगन से कर पाएँगे।


 4. धन-दौलत के पीछे न भागना

परिश्रम का मतलब ये नहीं है,कि धन-दौलत कमाने की होड़ में लगे रहें।धन हमारी जिन्दगी का बहुत बड़ा हिस्सा है,और अधिकांशत: धन-दौलत के कारण हमारी जिन्दगी में सुख- सुविधा और शाँति आती है।लेकिन धन ही जिन्दगी नहीं होती है,धन के लिए परिश्रम करने से हमें धन और सुख-सुविधा मिलती तो है,लेकिन कई बार मन की शांति नहीं मिल पाती है। परिश्रम करने का मतलब ये नहीं कि आप अपने लोगों को भूलकर पैसा कमाने में ही लगे रहें।परिश्रम करते हुए,अपने लोगों को साथ लेकर आगे बढ़ना चाहिए।


 5. समय बर्बाद न करना

हम अंदाजा लगा सकते हैं कि कामयाब हुआ व्यक्ति अपने जीवन में कभी भी अपने समय को बर्बाद होते हुए नहीं देखा होगा,जब भी उसको सफलता के लिए कुछ काम करने का अवसर मिला होगा तो उसने उस समय का सदुपयोग किया होगा।हम इस दूनिया के ऐसे कई महान व्यक्तियों के बारे में जानते हैं,जिन्होंने समय का सदुपयोग करके समय के साथ कठिन परिश्रम करते हुए कामयाबी हासिल की है। कई लोग आलस्यता में जीवन व्यतीत करते हैं।थोड़ा और धीरे-धीरे परिश्रम करके आराम से अपना जीवन व्यतीत करते हैं।परिश्रमी व्यक्ति कभी भी समय की बर्बादी में विश्वास नहीं रखता,वह निरंतर काम करते रहने में विश्वास करता है,पर समय की बर्बादी आलसी लोगों की निशानी होती है।कई बार परिश्रम करते रहने से भी मन मुताबिक फल नहीं मिलता है या फल मिलने में देरी होती है।लेकिन इस बात से हार मानकर चुपचाप बैठना सही नहीं होता है।अपने परिश्रम व काम पर विश्वास करने से सही समय पर सही चीज मिल जाता है।


परिश्रम के लाभ

सबसे पहले तो मैं बताना चाहुँगा कि परिश्रम करने से शारीरिक चुस्ती-स्फूर्ति बनी रहती है।आज कई लोग परिश्रम नहीं करने के कारण बीमार होते जा रहे हैं। इसलिए शारीरिक तंदुरुस्ती एवं स्फुर्ति के लिए लोगों को  परिश्रम करने की सलाह दी जाती है।इसी वजह से बहुत सारे लोग जिम में भी अपना समय बिताया करते हैं


मानसिक विकास के लिए भी मेहनत करना पड़ता है, इसी के परिणामस्वरुप लोग दूनिया में नये-नये खोज करते रहते हैं


परिॆश्रम करते रहने से हमारे मन में किसी प्रकार की नकारात्मक विचार उत्पन्न नहीं होते हैं,इससे हमारा मन अंदर से शाँति महसूस करता है।


परिश्रम करने से हमारे जीवन की मूल आवश्यकताओं की पूर्ति होती है।धन-सम्पत्ति की प्राप्ति होती है।हमारे जीवन की सभी सुख-सुविधा के साधन पूर्ण होने की सम्भावना होती है।



परिश्रम करने वाला व्यक्ति हमेशा सफलता की ओर बढ़ने का प्रयास करता है,और एक निश्चित समय में उसको सफलता मिल भी जाता है।

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